ओवरथिंकिग यानी जरूरत से ज्यादा सोचना , बहुत सोचना ......कई सारे लोग इस आदत से परेशान हो चुके हैं और उनकी निजी जिदंगी पर भी असर पड़ने लगा है। कई सारे लोग सोचते ही रहते जिससे उनकी मेंटल हेल्थ पर असर पड़ने लगता है। कई बार तो वो समस्या इतनी बड़ी होती भी नहीं है जितने वो सोचते हैं और बल्कि वो सोच-सोच कर प्रोब्लम को जरूरत से ज्यादा बड़ा कर देते हैं। क्या आप भी इस तरह की समस्या से झूझ रहे है तो ये अर्टिकल अपके लिए ही है.....
एक्सपर्टस के अनुसार , हमारा मस्तिष्क एक थिंकिंक मशीन है आसान शब्दों में उसका काम ही है सोचना और ये लगातार होता रहता है अगर हमारा मस्तिष्क सोचना बंद कर दे तो ये ज्यादा बड़ी समस्या होगी यानी विचार आना कोई समस्या नहीं है लेकिन बहुत ज्यदा सोचना और बहुत ज्यादा विचार आना और उसका असर हमारे स्वाथय पर पड़ना , चिड़चिड़ापन , तनाव , उदासीनता , घबराहट जैसी समस्यायें उतपन्न करने लगता है ।
क्यों होती हैं ओवरथिंकिंक?
साइकोलाजिस्ट राकिब अली ने एक इन्टरव्यु में बताया - कई लोगों में ये आनुवांशिक होता हैं तो कई लोगो की व्यक्तिगत समस्यायों के चलते जीवन के उतार-चढ़ाव के चलते ये ओवरथिंकिंक की समस्या आती हैं जैसे की कैरियर से सम्बन्धित समस्यायें , फाईनेंनसियल समस्या, पारिवारिक समस्या ।
क्या है नुकसान
ज्यादा सोचना यानी दिमाग का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल और जब जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल होगा तो जाहिर कि हमारा दिमाग थका हुआ महसूस करेंगा जिससे हम किसी की कार्य को पूरी यथार्थता के साथ नहीं कर पायेगे साथ ही साथ यह दिमाग कि शक्ति को कमजोर कर देती है और व्यक्ति तनाव में रहने लगता है।
क्या है उपाय
v सबसे पहले उस समस्या को पहचाने जिस वजह से आप ओवरथिंकिक करते है उस समस्या पर काम करे उससे बचे एक सकारात्मक वातावरण बनाये , सकारात्मक लोगों के साथ रहना शुरु करे
v अपनी रुचियों को पहचाने खाली समय में उन्हें अपनाये जैसे यदि अपको किताब पढ़ना पसन्द है तो खाली समय में किताब पढे न कि ओवरथिंकिंक करे।
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