लिंग पहचानने और लिंग बदलने के महत्त्वपूर्ण नियम
दोस्तो लिंग पहचान और लिंग परिवर्तन वर्तमान समय में परीक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण टापिक में से एक है। लिंग पहचनाना , लिंग परिवर्तन और कभी कभी तो लिंग परिवर्तन के नियम से सम्बधित प्रश्न भी विभिन्न परीक्षाओं में पूछ लिए जाते हैं , क्या हैं संज्ञा शब्दों के लिंग पहचानने और लिंग परिवर्तन से सम्बधित नियम , लिंग की परिभाषा , जानेगे और भी बहुत कुछ ।
शाब्दिक अर्थ ः लिंग का शाब्दिक अर्थ चिन्ह है । चिन्ह अर्थात जो किसी को इंगित करें । अब बात करते हैं लिंग की तो शब्द लिंग संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि शब्दों के पुरुष अथवा स्त्री होने का बोध कराता ।
हिंदी में लिंग के 2 प्रकार होते हैं,
1)- पुल्लिंग
2)- स्त्रीलिंग
लिंग पहचान-
प्राणीवाचक संज्ञा शब्द का लिंग पहचानना-
निम्नलिखित वाक्यों को पढ़िए-
1)- आदमी पढ़ रहा है । 2)- औरत पढ़ रही है ।
उपर्युक्त वाक्य में प्राणीवाचक संज्ञा शब्द आदमी , औरत का प्रयोग किया गया है तथा उन्ही के अनुरूप क्रिया शब्दों रहा है और रही का प्रयोग किया गया है । प्राणीवाचक संज्ञा शब्द के लिंग की पहचान उनके पुरुष और स्त्री होने के कारण आसानी से हो जाती है । अब बात करते हैं आप्रणीवाचक संज्ञा शब्दों के लिंग निर्णय की।
अप्राणीवाचक संज्ञा शब्द का लिंग पहचानना-
निम्नलिखित वाक्यों को पढ़िए-
1)- मशीन चल रही है। 3)-यह किताब पुरानी है।
उपर्युक्त वाक्यों में मशीन और किताब अप्राणीवाचक संज्ञा शब्द है जिसमें मशीन के लिए क्रिया रही व किताब के विशेषण पुरानी का प्रयोग किया गया है । अतः अप्राणीवाचक संज्ञा शब्दों के लिंग निर्णय के लिए उनके साथ प्रयुक्त होने वाले क्रिया और विशेषण शब्दों से की जा सकती है ।
लिंग पहचान के कुछ अन्य नियम
पुल्लिंग की पहचान नियम
निम्नलिखित नियमों द्वारा भी पुल्लिंग शब्दों को पहचाना जाता है ः-
1)-पर्वत , मास और ग्रहों के नाम पुल्लिंग में होते हैं। जैसे- हिमालय , एण्डीज , जनवरी , फरवरी , चैत्र, वैसाख, वरुण, यम आदि।
2)- पेड़ों के नाम । कुछ पेड़ों को छोड़ कर जैसें - तुलसी , इमली।
3)- आ, आव, पन, न प्रत्यय वालें शब्द जैसे- लड़कपन
4)- अनाजो के नाम ( मक्का, ज्वार, अरहर को छोड़कर)
5)- शरीर के अंगों के नाम ( जीभ, कलाई, अंगुली, कोहनी को छोड़कर)
6)- जल स्थल और भूमण्डल ( नदी, नहर, नाली, झील को छोड़कर)
नित्य पुल्लिंग शब्द - तोता , चीता , गीदड़, कौवा , खटमल , विच्छू , खरगोश।
स्त्रिलिंग की पहचान के नियम
1)- जिन संज्ञा शब्दों के अन्त में 'ख' होता
जैसे - ईख , भूख, चोख , राख
2)- जिन भावचक संज्ञाओं के अंत मे ( ट , वट, या हट )
जैसे - झंझट, आहत , चिकनाहट , बनावट
3)- अनुस्वारांत , ईकारांत , ऊकारांत , तकारांत वाले शब्द
जैसे - स्वयं , रोटी , रीति, बहू ,
4)- भाषा , बोली , लिपियाँ
जैसे - तेलगु , मराठी, देवनागरी
5)- नदियों , तिथियों , नक्षत्रों के नाम
जैसे - भद्रा , दूज , गोदावरी , यमुना ।
नित्य स्त्रीलिंग वाले शब्द - कोयल , मैना , मक्खी , तितली , मछली , छिपकली , चील , गिलहरी ।
शब्दों का लिंग परिवर्तन से सम्बन्धित नियम
1)- अकारन्त और आकारान्त पुल्लिंग शब्दों को ईकारान्त कर देने से स्त्रीलिंग बन जाता है, जैसें-
लड़का - लड़की , घोड़ा- घोड़ी,
2)- ई , इन , इया, आइन, और आनी लगाकर , जैसे-
पंडित - पंडिताइन
सुनार- सुनारिन
कुम्हार- कुम्हारिन
ठाकुर- ठकुराइन
लाला- ललाइन
नौकर- नौकरानी
माली- मालिन
सेठ- सेठानी
धोबी-धोबिन
हलवाई- हलवाइन
काका- काकी
नाना- नानी
मामा- मामी
शेर- शेरनी
नेता-नेत्री
अभिनेता-अभिनेत्री
बेटा- बिटिया
लोटा- लुटिया
3)-नर या मादा शब्द जोड़कर जैसे-
नर चीता , मादा चीता, नर तोता
उभयलिंग-
कुछ संज्ञाएँ उभयलिंगी होती है उन्हें सन्दर्भ के अनुसार स्त्रीलिंग और पुल्लिंग दोनो में प्रयोग किया जाता हैः-
जैसे- प्रधानमंत्री , डॉक्टर , राष्ट्रपति , अधिकारी।

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