PHYSICAL DIVISION OF INDIA भारत का भौतिक विभाजन , भाग 2 , केन्द्रीय उच्च भूमि


 दोस्तो भारत के भौतिक विभाजन के इस भाग में हम चर्चा करेंगे केन्द्रीय उच्च भूमि की , जानेगे क्या है परीक्षा के लिए खास । हम  उन बिन्दुओं की भी चर्चा करेगें जो परीक्षा के लिए महत्तवपूर्ण है। आगे बड़ने से पहले बता दे कि यदि आपने इस श्रंख्ला का पहला भाग नहीं तो क्लिक करें ।

केन्द्रीय उच्च भूमी

  • निक्षेपणात्मक व अपरदनात्मक क्रिया से निर्मित 
  • प्रायद्वीपीय पठार के सबसे उत्तर का भाग

  • चम्बल, सिंध, बेतबा, आदि इस क्षेत्र की नदियाँ
  • निम्मन भागों में विभाजित किया जा सकता 
  1. अरावली
  2. मालवा का पठार
  3. विन्धय श्रेणी
  4. बुन्देलखण्ड 
  5. बघेलखण्ड का पठार

केन्द्रीय उच्च भूमि अवस्थिती एवं विस्तार समझने के निम्मन मानचित्र का ध्यान पूर्वक अध्ययन करें मेवाड़ ,मालवा , बधेलखण्ड , बुन्देलखण्ड के पठार को दांय से बांय सजाये

  •  1.     मेवाड का पठार

    a)      अरावली और मालवा के मध्य

    b)      कुछ गुजरात मे अधिकतम भाग राजस्थान में

    c)       काली मिट्टी (बैसाल्टिक लावा से)

    d)      बनास और माही नदियां

2.बुन्देलखण्ड का पठार

·         पश्चिम में मालवा के पठार से पुर्व मे बघेलखण्ड के मघ्य

·         वेतवा और केन मुख्य नदियाँ

·         नदियों ने इस पठार को काटा और बीहड़ बनाये

 

3.विन्धयन श्रेणी

·         जोहट गुजरात से सासाराम बिहार तक

·         गुजरात में अधिक चौड़ा बिहार में कम

·         सद्भावना चोटी सबसे उँची चोटी (775मी.)

·         जलविभाजक का कार्य करती

·         पूर्व में कई भाग हो जाते जैसे – पन्ना, कैमूर, सोनपर, पारसनाथ

4.विन्धय श्रेणी

·         विन्ध्यन भू सन्नति से वलित पर्वत के रुप में उत्पत्ति

·         नर्मदा ताप्ति आदि प्रमुख नदियाँ 


केन्द्रीय उच्च भूमि नदियाँ 

केन्द्रीय उच्च भूमि की मुख्य नदियाँ चंबल, बेतवा , बनास, सिंध, काली आदि है जिन्हें निम्न चित्र में दर्शाया गया है


 

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